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EXPLAINER: बांग्लादेश-नेपाल के बीच मौजूद सिलिगुड़ी कॉरिडोर की 120 एकड़ जमीन क्यों है इतनी अहम? जिसके कागज आज खुद BSF को सौंपेंगे CM शुभेंदु, समझें पूरी बात

 Edited By: Vinay Trivedi
 Published : May 20, 2026 08:57 am IST,  Updated : May 20, 2026 10:25 am IST

शुभेंदु सरकार ने शपथ लेने के दसवें दिन ही वो फैसला ले लिया, जिसको ममता बनर्जी सरकार वर्षों से लटका रही थी। CM शुभेंदु अधिकारी आज खुद BSF को उस 120 एकड़ जमीन के कागजात सौंपने वाले हैं जो सिलीगुड़ी कॉरिडोर में आती है। जानें यह जगह केंद्र सरकार के लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों है।

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सिलिगुड़ी कॉरिडोर अब बनेगा भारत का मजबूत किला। Image Source : PTI

Siliguri Corridor Explained: पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी आज (बुधवार को) खुद सिलिगुड़ी जाकर जमीन के पेपर BSF को सौंपेंगे। इस जमीन की डिमांड केंद्र सरकार पिछले काफी समय से कर रही थी, लेकिन ममता बनर्जी कभी इसे संघीय मसला बता कर टाल रही थीं तो कभी इस पर सियासत कर रही थीं। लेकिन अब शुभेंदु अधिकारी ने फैसला लेते हुए ये जमीन केंद्र सरकार को सौंप दी है। केंद्र सरकार इस जमीन पर हाईवे और रेलवे नेटवर्क को मजबूत करेगी, जिससे नॉर्थ ईस्ट के राज्यों की बाकी भारत के साथ कनेक्टिविटी बेहतर होगी। साथ ही, आर्मी की मूवमेंट को भी आसान किया जा सकेगा। इस आर्टिकल में जानें कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर की इस 120 एकड़ जमीन पर केंद्र को अधिकार मिलना कितना जरूरी था।

CM शुभेंदु ने शपथ के 10 दिन के अंदर केंद्र को दी जमीन

शुभेंदु अधिकारी ने 9 मई को शपथ ली और अब 10 दिन के अंदर ही केंद्र सरकार की इस मांग को पूरा कर दिया। शुभेंदु सरकार ने नेशनल हाईवे के सात हिस्सों को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI और नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी NHIDCL को सौंपने की मंजूरी दे दी है।

सिलिगुड़ी कॉरिडोर का अहम हिस्सा है ये 120 एकड़ जमीन

जान लें कि जिस हिस्से का नोटिफिकेशन हुआ है वो 120 एकड़ का इलाका है और ये सिलिगुड़ी कॉरिडोर का अहम हिस्सा है। आज (बुधवार को) शुभेंदु अधिकारी खुद सिलिगुड़ी आकर इस कॉरिडोर की जमीन BSF को सौंपेंगे। अब जान लीजिए कि आखिर केंद्र सरकार इस कॉरिडोर की मांग क्यों कर रही है।

केंद्र सरकार को क्यों चाहिए सिलीगुड़ी कॉरिडोर का कंट्रोल?

दरअसल, इस रूट पर हाईवे प्रोजेक्ट्स का काम काफी समय से अटका हुआ है। सड़क चौड़ीकरण, मरम्मत और नए इंफ्रास्ट्रक्चर का काम नहीं हो पा रहा है। बेहतर सड़कें होंगी तो सेना और भारी सैन्य उपकरणों की आवाजाही तेज और आसान होगी। सिक्किम और उत्तर-पूर्वी राज्यों तक पहुंच मजबूत करने के लिए ये बहुत जरूरी है। केंद्र सरकार, इस इलाके में रेलवे नेटवर्क को भी मजबूत करने की योजना बना रही है।

सिलीगुड़ी कॉरिडोर में बिछेगी अंडरग्राउंड रेलवे लाइन

सिलीगुड़ी कॉरिडोर में अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर बनाने की योजना पर काम चल रहा है, ताकि किसी आपात स्थिति में भी संपर्क बना रहे। केंद्र सरकार की तरफ से इन महत्वपूर्ण रणनीतिक रास्तों की सीधी निगरानी से भारतीय सेना को फायदा मिलेगा। सिलीगुड़ी कॉरिडोर को केंद्र को सौंपने का फैसला ना केवल सामरिक तौर पर बड़ा फैसला है बल्कि उत्तर पूर्व के 7 राज्यों का डर भी छूमंतर कर देगा।

अंडरग्राउंड रेल लाइन के लिए रेलमंत्री का ऐलान

रेलमंत्री अश्‍विनी वैष्‍णव ऐलान कर चुके हैं कि देश के पूर्वोत्‍तर राज्‍यों को भारत से मजबूती के साथ जोड़ने के लिए 40 किलोमीटर की अंडरग्राउंड रेल लाइन बिछाई जाएगी। यह रेल लाइन इसी सिलीगुड़ी कॉरिडोर में बिछाई जाएगी, जिसे 'चिकन नेक' कहा जाता है।

कहां हैं ये सिलीगुड़ी कॉरिडोर?

सिलीगुड़ी के पश्चिम में नेपाल बॉर्डर पर पानीटंकी एक लोकेशन है और उसके पूर्वी दिशा में फूलबाड़ी है। इन दोनों के बीच 22 किलोमीटर चौड़ा एक सिलीगुड़ी कॉरिडोर है, जिसे भारत के दुश्मन इंडिया की चिकन नेक कहते हैं। ये सिलीगुड़ी कॉरिडोर, नेपाल और बांग्लादेश के इंटरनेशनल बॉर्डर से टच होता है। इसकी लंबाई कुल 60 किलोमीटर है।

इस सिलीगुड़ी कॉरिडोर से इंडिया के उत्तर-पूर्व के सात राज्य अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा कनेक्ट होते हैं। सिक्किम जाने का रास्ता भी यहीं से गुजरता है। नॉर्थ-ईस्ट इंडिया में जाने के लिए रोड के अलावा रेलवे लाइन भी मौजूद है।

पड़ोसी की जमीन पर कभी खराब नहीं की नीयत

1971 की जंग में पाकिस्तान की आर्मी ने जब बांग्लादेश में कत्ले-आम मचाया, उस वक्त इंडिया की फौज बांग्लादेश में अंदर तक घुस गई थी। बांग्लादेश की आजादी के वक्त इंडिया चाहता तो बांग्लादेश का कुछ हिस्सा अपने पाले में कर सकता था, लेकिन भारत की नीयत कभी पड़ोसी मुल्कों पर खराब नहीं रही। 22 किलोमीटर चौड़ा ये इलाका पूर्वोत्‍तर के सातों राज्‍यों को बाकी भारत के साथ जोड़ता है, जिस जगह यह कॉरिडोर बनाया जाएगा, वह हिस्‍सा नेपाल, भूटान और बांग्‍लादेश से घिरा हुआ है।

यही कारण है कि बार-बार इस पतले हिस्‍से पर कब्‍जा करने की बात कही जाती है। बांग्‍लादेश और चीन जैसे देश इस हिस्‍से पर कब्‍जा करके भारत के पूर्वोत्‍तर के सातों राज्‍यों पर कब्‍जा जमाने की नापाक मंसूबे पालते हैं। दिल्ली दंगे के दौरान भी शरजील इमाम ने इसी हिस्से को कट करके भारत सरकार को झुकाने की अपील की थी, लेकिन भारत का बुरा चाहने वालों के मंसूबे ना पहले पूरे हुए, ना अब होंगे। जिसे भारत की कमजोर नस समझा जाता था, वही इलाका अब समृद्ध और मजबूत बनेगा।

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